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वैलेंटाइन डे


यह कविता मेने अपने जीवनसाथी को

वैलेंटाइन डे वाले दिन भेंट की।


प्यार की सौगात


मैं तुमसे बहुत प्यार करती हूँ।

बिना किसी शर्त और वादे के,


मैं यह अभी भी इकरार करती हूँ,

बिना किसी चाहत और इरादे के।


हमारा प्यार कोई 16 वर्ष वाला नहीं,

यह प्यार 60 और 65 वर्ष वाला है।


जो परिपक्व है सब बंधनों से,

यह मजबूत है प्यार और रिश्तो से।


ना चाहत है कोई उपहार की,

एक गुलाब ही काफी है महकने को।


ना चाहत है हीरे जवाहरात की,

तुम्हारी बाहों का हार है पहनने को।


क्या हुआ अगर तुम्हें प्यार जताना नहीं आता,

गिला नहीं मुझे तो प्यार समझना बखूबी आता।


बस तुम सामने रहो मेरे मुझे कुछ और ना चाह,

तुम्हारे होने से ही मेरी चाहत और मेरी परवाह।


तुम सामने हो तो अमावस भी चांदनी रात लगती है,

तुम्हारे साथ रहने से मेरी दुनिया हंसी गुलजार लगती है।


सावन में बारिश, सर्दी में धूप,बसंत की हवा प्यारी है,
साथ जब तुम हो तो हर मौसम में खुशगवारी है।

तुम्हारा और मेरा प्यार हमेशा, हमारा प्यार रहे,

चाहे हालात और जमाना कुछ भी हो, हम बस हम ही रहे।


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